भीलवाड़ा जिले के बाल वैज्ञानिकों ने रचा अंतरराष्ट्रीय इतिहास
By Shubh Bhaskar ·
02 Feb 2026 ·
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भीलवाड़ा जिले के बाल वैज्ञानिकों ने रचा अंतरराष्ट्रीय इतिहास
शाहपुरा-राजेन्द्र खटीक।
शाहपुरा-शाहपुरा ब्लॉक के सरकारी स्कूल राउमावि पनोतिया के छात्रों ने खोजा नया क्षुद्र ग्रह, नासा–IASC ने किया प्रमाणित
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय पनोतिया (शाहपुरा) के विज्ञान शिक्षक महेश कुमार कोली के कुशल मार्गदर्शन में यहाँ के बाल वैज्ञानिकों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी सफलता हासिल करते हुए 2024 SD57 नामक एक नए क्षुद्र ग्रह (Asteroid) की खोज की है।
इस ऐतिहासिक उपलब्धि को इंटरनेशनल एस्टॉनोमिकल सर्च कोलैबोरेशन (IASC) द्वारा, जो कि नासा का पार्टनर संगठन है, आधिकारिक रूप से प्रमाणित किया गया है। इसकी पुष्टि सत्र 2024–25 में एक माह तक चले अंतरराष्ट्रीय अभियान के पश्चात इस सत्र में ई-मेल के माध्यम से प्राप्त हुई है।
इन बाल वैज्ञानिकों ने की खोज
इस खोज में विद्यालय के प्रतिभाशाली छात्रों प्रदीप कुमावत, राजाराम गुर्जर, अर्जुन खाती, धनराज गुर्जर, देवराज लौहार, चेतन बैरवा,बुद्धि प्रकाश कुमावत, हर्षित जांगिड़ ने टीम के रूप में भाग लेते हुए यह उपलब्धि अर्जित की।
पहले भी कर चुके हैं क्षुद्र ग्रह की खोज
यह पहली बार नहीं है जब पनोतिया विद्यालय के छात्रों ने अंतरिक्ष विज्ञान में अपनी पहचान बनाई हो। इससे पूर्व सत्र 2021–22 में शिक्षक महेश कुमार कोली के मार्गदर्शन में अनिल कुमावत, राधा कुमावत, हनुमान कुमावत एवं रवि रेगर की टीम ने 2022 QV57 नामक क्षुद्र ग्रह की खोज की थी।
दोनों अभियानों में शामिल सभी बाल वैज्ञानिकों एवं मार्गदर्शक शिक्षक महेश कुमार कोली को IASC–नासा द्वारा ई-मेल के माध्यम से विशेष प्रमाण पत्र प्रदान किए गए हैं।
मुख्य एस्टेरॉइड पट्टिका में कर रहे हैं सूर्य की परिक्रमा
शिक्षक कोली ने बताया कि वर्तमान में दोनों क्षुद्र ग्रह मंगल और बृहस्पति ग्रह के मध्य स्थित मुख्य एस्टेरॉइड पट्टिका में सूर्य की परिक्रमा कर रहे हैं। 2024 SD57 क्षुद्र ग्रह सूर्य की एक परिक्रमा लगभग 4.34 वर्ष में पूरी करता है तथा इसकी पृथ्वी से न्यूनतम दूरी लगभग 13.4 करोड़ किलोमीटर है।
वहीं 2022 QV57 क्षुद्र ग्रह सूर्य की एक परिक्रमा लगभग 4.35 वर्ष में पूरी करता है और इसकी पृथ्वी से न्यूनतम दूरी लगभग 15 करोड़ किलोमीटर है।
भविष्य में मिलेगा नामकरण का अधिकार
कोली ने जानकारी दी कि जिन तिथियों को इन क्षुद्र ग्रहों की खोज की गई है, उनके आधार पर जब ये क्षुद्र ग्रह सूर्य की अपनी कक्षा में एक पूर्ण परिक्रमा पूरी कर लेंगे, तब खोजकर्ता टीम को अपनी पसंद से इनके नाम रखने का अधिकार प्राप्त होगा।
75 से अधिक छात्र बन चुके हैं ‘सिटीजन साइंटिस्ट
उन्होंने बताया कि विद्यालय में सत्र 2020–21 से निरंतर इस अंतरराष्ट्रीय अभियान में विद्यार्थियों को शामिल किया जा रहा है। अब तक 75 से अधिक छात्र इस कार्यक्रम में भाग ले चुके हैं और सभी को IASC–नासा द्वारा ‘Citizen Scientist’ सहभागिता प्रमाण पत्र प्रदान किया गया है।
यह उपलब्धि न केवल विद्यालय, बल्कि पूरे भीलवाड़ा जिले और राजस्थान के लिए गर्व का विषय है, जो यह सिद्ध करती है कि सरकारी विद्यालयों के छात्र भी अंतरिक्ष विज्ञान में वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं। IASC (International Astronomical Search Collaboration) क्या है? IASC एक अंतरराष्ट्रीय खगोल विज्ञान कार्यक्रम है, जो विद्यार्थियों और शिक्षकों को नए क्षुद्रग्रह (Asteroids) खोजने का अवसर देता है।
यह कार्यक्रम NASA और University of Arizona (Lunar & Planetary Laboratory) से जुड़ा है।
इसमें प्रतिभागियों को अंतरिक्ष दूरबीनों से ली गई असली खगोलीय तस्वीरें दी जाती हैं।
छात्र-शिक्षक एक विशेष सोफ्टवेयर से इन तस्वीरों का विश्लेषण कर नए क्षुद्रग्रह खोजते हैं।
खोज की पुष्टि होने पर उसे अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिलती है और नामकरण की प्रक्रिया होती है।