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अलवर में टूटा 20 साल का रिकॉर्ड, भीषण गर्मी में भी नहीं गहराया पेयजल संकट। कलेक्टर अर्तिका शुक्ला की रणनीति, सतत मॉनिटरिंग और समयबद्ध तैयारियों का दिखा असर।

By Shubh Bhaskar · 04 Jun 2026 · 13 views
अलवर में टूटा 20 साल का रिकॉर्ड, भीषण गर्मी में भी नहीं गहराया पेयजल संकट।
कलेक्टर अर्तिका शुक्ला की रणनीति, सतत मॉनिटरिंग और समयबद्ध तैयारियों का दिखा असर।

*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*

(माचाड़ीअलवर):- अलवर- अलवर जिले में इस वर्ष भीषण गर्मी के बावजूद पेयजल व्यवस्था अपेक्षाकृत बेहतर रहने से आमजन को बड़ी राहत मिली है। वर्षों से मई-जून के महीनों में जल संकट को लेकर होने वाले प्रदर्शन, सड़क जाम और जनआक्रोश की घटनाएं इस बार लगभग नदारद रहीं, जिसे पिछले करीब 20 वर्षों के दौरान एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
इस उपलब्धि का श्रेय जिला कलेक्टर अर्तिका शुक्ला की दूरदर्शी कार्ययोजना, नियमित समीक्षा बैठकों और प्रभावी प्रशासनिक मॉनिटरिंग को दिया जा रहा है। गर्मी शुरू होने से पहले ही जिला प्रशासन ने पेयजल व्यवस्था को प्राथमिकता देते हुए जल स्रोतों के प्रबंधन, वितरण प्रणाली और वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान केंद्रित किया। इसके परिणामस्वरूप संभावित जल संकट को काफी हद तक नियंत्रित करने में सफलता मिली।
हर वर्ष गर्मी के मौसम में शहर के कई क्षेत्रों में पानी की कमी को लेकर लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता था, लेकिन इस बार अधिकांश इलाकों में स्थिति संतोषजनक रही। न तो पानी के लिए लंबी कतारें देखने को मिलीं और न ही टैंकरों पर निर्भरता पहले जैसी नजर आई। इससे आम नागरिकों के साथ-साथ प्रशासन और पुलिस विभाग पर भी अतिरिक्त दबाव कम हुआ।
सूत्रों के अनुसार कलेक्टर अर्तिका शुक्ला ने पेयजल व्यवस्था को केवल विभागीय कार्य तक सीमित न रखते हुए इसे जनसरोकार का विषय माना और अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित की। लगातार निगरानी और समय-समय पर समीक्षा के कारण जलापूर्ति व्यवस्था पर प्रभावी नियंत्रण बना रहा।
हालांकि कुछ क्षेत्रों से अभी भी जलापूर्ति संबंधी शिकायतें सामने आ रही हैं, लेकिन समग्र रूप से देखा जाए तो इस वर्ष की स्थिति पिछले वर्षों की तुलना में कहीं अधिक बेहतर और संतोषजनक रही है। नागरिकों का मानना है कि यदि इसी प्रकार पूर्व नियोजन, सख्त निगरानी और जवाबदेह प्रशासनिक व्यवस्था जारी रही तो भविष्य में भी पेयजल संकट को काफी हद तक नियंत्रित रखा जा सकेगा।
इस बीच प्रकृति ने भी अलवरवासियों का साथ दिया। नौतपा के दौरान मौसम में आए बदलाव, ठंडी हवाओं और समय-समय पर हुई राहतभरी बूंदाबांदी ने गर्मी के असर को कम किया। गुरुवार, ०4 जून को बदले मौसम ने लोगों को मानो लोकगीत "झट चौमासो लाग्यो रे" गुनगुनाने पर मजबूर कर दिया। प्रशासनिक प्रयासों और मौसम की मेहरबानी के संयुक्त प्रभाव से इस बार अलवर में गर्मी का मौसम अपेक्षाकृत राहतभरा साबित हुआ।

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